Satvik Abhinay सात्विक अभिनय

Satvik Abhinay सात्विक अभिनय

सात्विक अभिनय Satvik Abhinay का विषय रसशास्त्र से जुड़ा हुआ है। रस नाट्यशास्त्र का एक आधारभूत सिद्धांत है। यही उसका सौंदर्यशास्त्र है। रसानुभूति ही नाट्य प्रयोग की चरम परिणति है। लेखक, अभिनेता और दर्शक तीनों का प्रयोजन रसानुभूति है। यहां विषय रस नहीं, अभिनय है। नाट्यशास्त्र में सात्विक भाव का प्रयोग दो अर्थों में किया गया है-…

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Vachik Abhinay वाचिक अभिनय

Vachik Abhinay वाचिक अभिनय

वाचिक अभिनय के अंतर्गत संवाद, कथन-शैली, भाषा, व्याकरण, छंद, काकु (स्वर का आरोहावरोह), शमन, दीपन और काव्यशास्त्र सभी कुछ आता है और इस Vachik Abhinay का वर्णन नाट्यशास्त्र में मिलता है। लेकिन हम इस अध्याय में अपने को केवल वाक्य-विन्यास, संवाद, शैली तक ही सीमित रखेंगे। जैसा कि सर्वविदित है प्राचीन संस्कृत नाटकों में संवाद…

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Aangik Abhinay आंगिक अभिनय

Aangik Abhinay आंगिक अभिनय

नाट्यशास्त्र में Aangik Abhinay आंगिक अभिनय के अंतर्गत विभिन्न अंगों और प्रत्यंगों की मुद्राओं और गतियों का सूक्ष्म और विस्तृत विवेचन किया गया है। आंगिक अभिनय को इतना अधिक महत्व देने के तीन कारण हैं । 1-  नृत्य को नाट्यकला का ही अंग माना गया है। अंगों की विभिन्न मुद्राएँ नृत्य के लिए भी निर्धारित…

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Acting  Abhinay Kya Hai 

Abhinay Kya Hai अभिनय क्या है

What is Acting ?  Abhinay Kya Hai ? अभिनय केवल रंगमंच,फ़िल्म और टेलीविज़न तक ही सीमित नहीं है, अपने व्यापक अर्थ से सारे वे समस्त कार्यकलाप Acting अभिनय की श्रेणी में आते हैं जो आंतरिक भावों को दूसरों तक पहुँचाते हैं-अभिनीत करते हैं।  अभिनय, भूमिका और सामान्य जीवन… समझने की कोशिश करते हैं कि Abhinay Kya Hai ? आंगिक…

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