लहरों के राजहंस पात्र एवं उनका परिचय

लहरों के राजहंस पात्र एवं उनका परिचय

Lahron Ke Rajhans नाटक के प्रमुख पात्र एवं उनका परिचय

नंद-     नाटक का केन्द्रीय पात्र नंद गौतम बुद्ध का सौतेला भाई था। यह नाटक उनके मानसिक द्वन्द्व के इर्द-गिर्दं रचा गया है। एक ओर वे गौतम बुद्ध से प्रभावित होकर भिक्षु बनना चाहते हैं दूसरी ओर अपनी पत्नी सुन्दरी पर भी अनुरक्त है। जब नंद सुन्दरी के पास होते हैं तब वे आध्यात्मिक होना चाहते हैं लेकिन जब तथागत के निकट होते हैं तो सांसारिकता से मुक्त नहीं हो पाते। नंद मन का प्रतीक है।

श्यामांग-  नंद का कर्मचारी। यह वैचारिक रूप से अन्तद्र्वन्द्व में जीता हैं। इसका मन भी नंद और लहरों के राजहंस की तरह स्थिर नहीं है।

सुन्दरी-  नंद की रूप गर्विता रानी जो सांसारिकता में पूरी तरह रमी हुई हैं। वह गौतम बुद्ध के सन्यास के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से यशोधरा की उदासीनता को दोषी मानती है। सुंदरी संसार का प्रतीक है।

श्वेतांग-  नंद का प्रधान कर्मचारी तथा राजमहलों में नंद और सुन्दरी का विश्वासपात्र।

अलका-  सुन्दरी की परिचारिका व सहेली जो उसका पूरा ध्यान रखती हैं।

नीहारिका-  दासी।

भिक्षु आनंद-  गौतम बुद्ध का शिष्य।

मैत्रेय- नंद का मित्र।

शंशाक- गृहाधिकारी।

लहरों के राजहंस Lahron Ke Rajhans – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1- गौतम बुद्ध का किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
⇒ तथागत

2- ‘मुझे तुमसे इर्ष्या होती है’ कथन है-
⇒ श्यामांग

3- ’लहरों के राजहंस’ की कथा किस ग्रन्थ से ली गई है –
⇒ सौन्दरानन्द

4- सुन्दरी का आसन कैसा था?
⇒ मत्स्याकार

5- ’लौटकर वे नहीं आये, जो आया है वह व्यक्ति दूसरा है।’ यह कथन है –
⇒ सुन्दरी

6- ‘अन्यथा यह ना हो कि कल को तु भी भिक्षुणी का वेश धारण करने की बात सोचने लगे’ कथन है-
⇒ सुन्दरी ने अलका से कहा।

7- ’लहरों के राजहंस’ नाटक में किस पात्र को नन्द के मन के भटकाव की चीख के रूप में प्रस्तुत किया गया है?
⇒ श्यामांग

8- ‘तो तुम थे जो कमल-ताल में राजहंसो पर पत्थर फैंक रहे थे’ कथन है-
⇒ सुन्दरी का ।

9- ’मुझसे पूछना चाहते हो ? परन्तु जो व्यक्ति तुम्हारे किसी भी प्रश्न का उत्तर दे सकता है, वह मैं नहीं हूँ। उत्तर तुम्हें केवल एक ही व्यक्ति से मिल सकता है और उस व्यक्ति का नाम नन्द है। ’’यह कथन है –
⇒ भिक्षु आनंद

10- ‘तुम समझते हो मैं तुम्हारी इन बेसिर-पैर की बातो पर विश्वास कर लूँगी’ कथन है-
⇒ सुन्दरी का।

11- ’’नारी का आकर्षण पुरुष को पुरुष बनाता है तो उसका अपकर्षण गौतम बुद्ध बना देता है।’’ इस कथन से सुन्दरी ने किस पर कटाक्ष किया है –
⇒ यशोधरा

12- ‘तुम्हारी मनःस्थिती में मैं होता, तो शायद मैं भी वैसा ही करता’ कथन है-
⇒ नन्द का।

13- ’सब कुछ एक आवर्त में घूम रही है। एक चील………. एक चील सब कुछ झपट कर लिए जा रही है। इसे रोको। इसे रोको।’ यह कथन है –
⇒ श्यामांग

14- ‘मैं किस पर अधिक मुग्ध हूँ-तुम्हारी सुन्दरता पर या चातुरी पर’ कथन है-
⇒ नन्द का।

15- ’लग रहा था जैसे हाथ लगाते ही वह आशंका से कांप जाएगा।’ वह शब्द किससे लिए आया है –
⇒ मृग

16- ‘क्या कहते हैं आपका ब्याह एक यक्षिणी से हुआ है जो हर समय आपको अपने जादू से चलाती है’ कथन है-
⇒ नन्द का।

17- श्वेतांग अभी तुम्हें तुम्हारे गंतव्य तक पहुँचा आयेगा।’ यहाँ सुन्दरी के इस कथन में गंतव्य का क्या अभिप्राय है-
⇒ अंधकूप

18- ‘यक्षिणी हो या नहीं, मैं नहीं कह सकता, परन्तु मानवी तुम नहीं हो’ कथन है-
⇒ नन्द का।

19- कमलताल में किसने पत्थर फैंका था जिससे हंसों का क्रंदन हो उठा था –
⇒ श्यामांग

20- नंद का प्रधान कर्मचारी कौन था –
⇒ श्वेतांग

21- ’लहरों के राजहंस’ का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
⇒ 1963

22- ’मैं चौराहे पर खङा एक नंगा व्यक्ति हूँ जिसे सभी दिशाएँ लील लेना चाहती हैं और अपने को ढकने के लिए उसके पास कोई आवरण नहीं है।’’ यह किसने कहा –
⇒ नंद

23- ’’नारी का आकर्षण पुरुष को पुरुष बनाता है तो उसकी अपकर्षण गौतम बुद्ध बना देता है।’’ सुन्दरी ने यह कथन किससे कहा –
⇒ अलका

24- कामोत्सव में उपस्थित होने वाला एकमात्र अतिथि था –
⇒ मैत्रेय

25- ’’कोई गौतम बुद्ध से कहे कि कभी कमल ताल के पास जाकर इनसे भी निर्वाण और अमरत्व की बात कहें’’, यह कथन किसका है –
⇒ सुन्दरी

26- ’लहरों के राजहंस’ नाटक मेंं कथा का संबंध किस स्थान से है –
⇒ कपिलवस्तु

27- ’’और किसी को पहचानने में मैं भूल कर सकती हूँ, पर उन्हें पहचानने में नहीं।’’ यहाँ ’उन्हें’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ ?
⇒ बौद्ध भिक्षु-मूर्ति के लिए

28- मैं, मैं नहीं हूँ तुम, तुम नहीं हो, वह, वह नहीं है। सब किसी उँगली से आकाश में बनाए गये चित्र हैं नंद के इन विचारों में निहित भाव है ?
⇒ वैराग्य

29- किससे  भयभीत होकर श्यामांग पत्थर फैंकता था ?
⇒ छाया

30- मोहन राकेश का ’लहरों के राजहंस’ कितने अंकों का नाटक है –
⇒ तीन

31- मोहन राकेश के किस नाटक में महात्मा बुद्ध के सापेक्ष सौन्दरनंद की कथा को आधार बनाया गया है –
⇒ लहरों के राजहंस

32- नंद की मनोस्थिति का आधुनिक परिवेश में क्या संकेत है –
⇒ यथार्थ और आदर्श के सामंजस्य से जूझता मनुष्य

33- मोहन राकेश के ’लहरों के राजहंस’ की नायिका है-
⇒ सुन्दरी

34- ’लहरों के राजहंस’ में राजहंस शब्द का अभिप्राय है-
⇒ नंद
35- ’’कल और आज के बीच जो बाहर रहा है वह भी किसी प्रभाव के कारण नहीं, अपनी आवश्यकता के कारण।’’ उक्त कथन किसने कहा –
⇒ सुन्दरी से नंद ने

36- ’’आज तक कभी हुआ है कि कपिलवस्तु के किसी राजपुरुष ने इस भवन से निमंत्रण पाकर अपने को कृतार्थ न समझा हो।’’ उक्त कथन में सुन्दरी के किस भाव को अभिव्यक्ति मिली है –
⇒ गर्विता नारी

37- ’’मैं, मैं नहीं हूँ, तुम तुम नहीं हो, वह, वह नहीं है। किसी उँगली से आकाश में बनाए गए चित्र है, जो बनने के साथ-साथ मिटते जाते हैं ?’’ उक्त कथन के वक्ता है –
⇒ नंद

38- ’’मुझे रोकने का तो प्रश्न ही नहीं नन्द, जिसे तुमने रोके रखा है वह व्यक्ति कोई दूसरा ही है।’’ उक्त कथन किसने कहा –
⇒ भिक्षु आनंद

39- ’’फिर जिस ताल में इतने दिनों से थे, उसका अभ्यास, उसका आकर्षण क्या इतनी आसानी से छूट सकता था ?’’ उक्त कथन अलका से किसने कहा ?
⇒ सुन्दरी

40- ’’कुछ है जो चेतना पर कुंडली मारे बैठा रहता है और मुझे अपने से मुक्त नहीं होने देता ?’’ उक्त कथन नंद के किस भाव को व्यक्त करता है –
⇒ संसार और अध्यात्म के चुनाव और निर्णय को

41- ’’कह नही सकता कौनसा उन्माद अधिक भयानक है- वह जो चेतना की ग्रंन्थियों को तोङ देता है।’’ उक्त कथन किसने सुन्दरी से कहे –
⇒ नंद

42- ’’मेरी कामना मेरे अन्तर की है, बाहर का आयोजन उसके लिए उतना महत्व नहीं रखता।’’ उक्त कथन सुन्दरी ने किसे कहा –
⇒ मैत्रेय

43- ’’कामोत्सव कामना का उत्सव है।’’ सुन्दरी ने यह कथन किससे कहा –
⇒ मैत्रेय

44- यशोधरा सन्यास दीक्षा किससे लेने वाली थी –
⇒ महात्मा बुद्ध से

45- सुन्दरी ने कामोत्सव का आयोजन क्यों किया ?
⇒ सन्यास की महीमा खण्डन और काम का मंडन करने के लिए

46- ’लहरों के राजहंस’ नाटक में अन्तद्र्वन्द्व के मध्य कौन पात्र अनिर्णय की स्थिति में रहता है –
⇒ नंद

47- नंद कौन है –
⇒ बुद्ध का सौतेला भाई

48- ’लहरों के राजहंस’ नाटक की कथा का केन्द्र बिन्दु है –
⇒ संसार और अध्यात्म का चुनाव

49- ’सौन्दरानंद’ नामक काव्य ग्रंथ के लेखक है –
⇒ अश्वघोष

50- ‘मेरा मन साधारण बातों में असाधारण अर्थ नहीं ढूँढ़ता’ कथन है-
⇒ सुन्दरी का।

51- ‘और किसी को पहचानने में भूल कर सकती हूँ, उन्हे पहचानने में नहीं’ कथन है-
⇒ अलका का।

52- ‘आहत होना ही उनके उड़कर चले जाने का कारण हो’ कथन है-
⇒ अलका का।

53- ‘सम्भवतः उसे देखने के लिए जो दृष्टि चाहिए, वह दृष्टि तुम्हारे पास नहीं है’ कथन है-
⇒ नन्द का।

54- ‘‘वाणी के छल से तुम मुझे किस ओर ले जाना चाहते हो। परन्तु वह दिशा मेरी नहीं है। कदापि नहीं है’’ कथन है-
⇒ नन्द का।

55- ‘सिर एक भिक्षु का, और शेष शरीर-शेष शरीर एक आहत योद्धा का’ कथन है-
⇒ सुन्दरी का ।

स्तानस्लावस्की का अभिनय सिद्धांत

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